श्री सुसवाणी चालीसा (Suswani Chalisa)

श्री सुसवाणी चालीसा

दोहा

मात तुम्हारे नाम का, घर-घर में गुणगान।
विनती तुमसे एक ही, रखियो मेरो ध्यान।।

स्वर्ग से सुन्दर वो जगह, मात जहाँ ली विश्राम।
जग में न्यारो है बड़ा, मैया मोरखाणा धाम।।

संवत् बारह सौ उन्नीस, आसोज सुदी द्वितीय।
सेठ सतिदास के घरां, माँ अवतार लिया।।

चौपाई

जै जै जै सुसवाणी माता।
जो कोई प्रेम से तुमको ध्याता।।

श्रद्धा से झुक जाता माथा।
जो भी तेरी गाये गाथा।।

कोई पैदल चलकर आवे।
पसर-पसर कर कोई जावे।।

लाल ध्वजा मंड पे लहरावे।
नारेलां की भेंट चढ़ावें।।

मंगल करनी हे सुखदायी।
हे सुसवाणी हे महामाई।।

संकट में तू दौड़ी आई।
जग नेह तेरी महिमा गयी।।

तू कल्याणी तू वरदानी।
हम मूरख है और अज्ञानी।।

भूल पे मैया ध्यान ना दीजो।
हमको अपनी शरण में लीजो।।

तू मैया मन की अति भोली।
भगतों की दर पे आवे टोली।।

तू सब पे करूणा बरसाती।
प्रेम के रंग में सबको नुहती।।

दोहा

आपकी भक्ती प्रेम से मन होवे भरपूर।
राग द्वेष से चितमेरा कोसों भागे दूर।।

चौपाई

जो भी तेरे दर पे आता।
खाली हाथ नहीं वो जाता।।

भर देती है झोलियां खाली।
तू हर बगिया की है माली।।

सच्चे भगत को परचा देती।
स्वप्न में आके बातें करती।।

मुख से जो बोले जयकारा।
कभी न फिरता मारा-मारा।।

जो जीवन से हार गया है।
वो माता के द्वार गया है।।

मैया उसकी बांह पकड़ती।
पल में संकट दूर वो करती।।

कंचन थाल कपूर की बाती।
ज्योत जले माँ की दिन राती।।

आरती सच्चे मन से जो करता।
उसको ही सच्चा फल मिलता।।

आप वीरा जो नगर मोरखाणा।
सेवा करता दुग्गड़ सुराणा।।

रतन जडित सिंहासन बैठी।
धुप दीप से पूजा होती।।

चुडा चूनड़ मेहँदी भाये।
पुष्पों की बौछार हो माथे।।

द्वार तेरे माँ नौबत बाजे।
छप्पन व्यंजन भोग लगावे।।

अंधे को आँखें कोढ़ी को काया।
निर्धन को भर देती माया।।

बांझ को देती सूत सुकुमारा।
तेरी दया का पार ना पारा।।

सेवक द्वार खड़े माँ तेरे।
चंवर डुलावे माँ बहुतेरे।।

सुर नर मुनी सब सकल मनावे।
हरख-हरख तेरो जस गावे।।

शरण में आ सेवक गुण गाता।
कृपा करे सुसवाणी माता।।

विराजी जिस दिन से महामाई।
दिखलाई अनुपम सकलाई।।

दोहा

उजड़ा खेड़ा फिर बसे, निर्धनीया धन होए।
जो सुसवाणी ने पूजता, आनन्द मंगल होए।।

चौपाई

दया की वर्षा है बरसाई।
खूब बड़ाई वेदों ने गाई।।

सुसवाणी माँ की महिमा भारी।
दर्शन को आते नरनारी।।

शक्ति रूप में व्याप्त है मैया।
सबकी पार लगाती नैया।।

महिमा तेरी जग में छाई।
घर-घर में जाती है गाई।।

माँ के दर्शन नित्य करे जो।
उनकी सब विपदायें हरे वो।।

अन्न-धन्न से भंडार माँ भरती।
सबका मैया मंगल करती।।

सुसवाणी माँ की प्रभुताई।
ना कवियों के कहने में आई।।

माता के सत की सकलाई।
विश्व में व्यापक होकर छाई।।

धरती में समा गई भवानी।
केर का पेड़ भी कहता कहानी।।

जो यह पढ़े सुसवाणी चालीसा।
मात कभी ना लेती परीक्षा।।

दुग्गड़ सुराणा चरणों का चेरा।
करना मात हृदय महँ डेरा।।

जो शरणागत माँ की आवे।
“गोपी” मनवांछित फल पावें।।

दोहा

सुसवाणी मां आप हो, पाप की मोचन हार।
छमा करो अपराध सब, कर दो भव से पार।।

आपकी भक्ति में सदा, लगा रहे ये दास।
दर्शन देगी माँ मुझे, पूरा है विश्वास।।

Suswani Chalisa in Hindi

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