श्री हरसिद्धि माता चालीसा
श्री हरसिद्धि माता चालीसा
आध्यसति हरसिद्धि माई।
विश्व में सब में माई समाई।।
त्रिलोक शंख सुर ने जित लिया।
ब्रम्हा हरि हर ने बिनाति किया।।
शुंभ बिज रक्त दानव संहारे।
चक्र मुंड धुम्न लोचन को मारे।।
महिसा सुरि अभिमानी मारा।
त्रिलोक का माने भार उतरा।।
नेत्रो दे गिरि अश्र मितवा।
मदन सोनी ने तै लक्ष्मी वरसावा।।
सागर में जगदुषा ने पुकारा।
वहां सहित माई ने उगारा।।
वेद शास्त्रो पुराण थके।
ज्ञानी मार्कंड वशिष्ठ महिमा वखान।।
चरणो पुंजन मारकंडे किंधा।
तम अभय शरण तेने दीन्हा।।
तभ वेद ऋषि आश्रम जावा।
मेघ ऋषि को कर्म कथा सुनावा।।
तब मेघ ने चंडी पथ सुनै।
मनत्र सही उपासना बताई।।
देवो हत्थे अभय वरदे भाई।
वरदान मां चरणों से मिल जाई।।
विद्यादान मयी से विद्यार्थी पावे।
सुहागन भले में कंकू सुहावे।।
कुमारिका को इच्छा वर मिलावे।
डाकन सकान भूत भगावे।।
नित्य वंदी सिन्दूर भले लगावे।
वो निर्धन धन्वन हो जावे।।
दीप कर प्रसन्न थाओ अम्बा।
अब दर्शन दो ना करो विलाम्बा।।
अधिक व्याधि उपधि मुझको घेरो।
हरसिद्धि बिन सहारो न मारो।।
जिस पर हरसिद्धि कृपा होई।
चिंतन करे तो सर्वस्व हो जाए।।
कृपा करो मुझ पर महाराज नी।
सिद्ध करिए अम्बी महारानी।।
शरीर रोग रूण होय अपार।
वो नर पथ करे सो बार।।
मां चिंतन से रूण विमोचन हो जाए।
मां शरणे सर्व सुखदाई।।
ॐ एम्म ह्रीं क्लीम श्री हरसिद्धि देवाय नमः
Harsiddhi Chalisa in Hindi