श्री क्षेत्रपाल चालीसा (Shri Kshetrapal Chalisa)

श्री क्षेत्रपाल चालीसा

दोहा

क्षेत्रपाल महाराज को, मन मंदिर में ध्याय।
लिखने का साहस करूं, चालीसा सुखदाय।।
विघ्नहरण मंगलकरण, क्षेत्रपाल महाराज।
करूं भक्ति श्रद्धा सहित, पूर्ण करो सब काज।।

चौपाई

जैनधर्म प्राकृतिक कहाया।
ग्रन्थ पुराण में है बतलाया।।
उसमें वर्णित कई वाक्य हैं।
तीर्थंकर प्रभु वचन सार्थ हैं।।

हुए पूज्य आचार्य हमारे।
उन वचनों को मन में धारें।।
पुनः प्राणि हित बतलाया है।
जिसने उसको अपनाया है।।

वह समयग्दृष्टी कहलाया।
ऊर्ध्वगती को उसने पाया।।
पूज्यपाद आचार्य एक हैं।
कई ग्रन्थ रचनाएं की हैं।।

उनने हम सबको बतलाया।
पंचामृत अभिषेक बताया।।
और बताया एक वाक्य है।
शासन देवी देव मान्य हैं।।

सब सम्यग्द्रष्टी कहलाए।
जिनशासन रक्षक बतलाए।।
उनके वचनों पे श्रद्धा कर।
करें विराजित मंदिर अंदर।।

जिनवर सम नहिं पूज्य किन्तु ये।
आदर करने योग्य कहे हैं।।
जो माने नहिं मिथ्याद्रष्टी।
भक्त पे करें कृपा की वृष्टी।।

उनमें क्षेत्रपाल जगनामी।
हर शुभ कार्य में पूजा मानी।।
उनका आव्हानन करते हैं।
सब निर्विघ्न कार्य होते हैं।।

राजस्थान में जिला करौली।
ग्राम डाबरा कथा अनोखी।।
क्षेत्रपाल बाबा का मंदिर।
मेला हो भादों सुदि नवमी।।

सहस वर्ष पहले की घटना।
पराड्या वंशज द्वारा बनना।।
मनोकामनापूरक बाबा।
हरते भूत प्रेत की बाधा।।

संकट सारे पल में नाशें।
विघ्न नाम जपने से भागें।।
सकल सौख्य के पूरक दाता।
धन सम्पति सौभाग्य प्रदाता।।

परम कृपाला, दीनदयाला।
हर मंदिर में इनका आला।।
देव, शास्त्र, गुरु आयतनों की।
रक्षा में तत्पर रक्षक जी।।

भारत में कई एक तीर्थ हैं।
जहां विराजे बाबाजी हैं।।
बड़ी मान्यता कई जगह है।
करते सब तैलाभिषेक हैं।।

क्षेत्रपाल की अर्चा करते।
सब मनवान्छा पूरी करते।।
शाश्वत श्री सम्मेदशिखर जी।
बड़ी मान्यता है बाबा की।।

अगर मार्ग से कोई भटके।
वाहन आकर संकट हर ले।।
मार्ग दिखाता रक्षा करता।
भक्त स्वयं मुख से यह कहता।।

यात्रा कठिन मगर पूरी हो।
हर्षित मन सब नर- नारी हों।।
पांच नाम इनके बतलाए।
विजय वीर मणिभद्र कहाए।।

अपराजित भैरव भी नाम है।
उनको शत मेरा प्रणाम है।।
कूकर वाहन कहा आपका।
इक कर में तिरशूल शोभता।।

अतदाकार व तदाकार हैं।
तदाकार में प्रभु विराजते।।
जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में।
बाबा राजें जिनमंदिर में।।

भक्त मनौती वहाँ मनाते।
सथिया उल्टी वहाँ बनाते।।
मन की इच्छा पूरी होती।
आकर वहाँ जलाते ज्योती।।

बना साथिया सीधी फिर से।
तेल सिंदूर हैं अर्पण करते।।
रक्षकदेव बड़े अतिशायी।
बिगड़ी सबकी खूब बनाई।।

मैं भी द्वार तिहारे आया।
सांसारिक दुःख से अकुलाया।।
हे सम्यग्द्रष्टी बाबाजी।
मेरे सारे कष्ट हरो जी।।

शम्भु छंद

जिनशासन के रक्षक देवा, संकटहर्ता मंगलहर्ता।
तेरा आराधन अरु सुमिरन, भक्तों की झोली है भरता।।
महिमा तेरी है बहुत सुनी, इसलिए ‘इंदु’ ली तुम शरणा।
जिनधर्म में श्रद्धा बनी रहे, अंतिम क्षण प्रभू ध्यान मन मा।।

Kshetrapal Chalisa in Hindi

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