श्री स्कंदमाता चालीसा (Maa Skandmata Chalisa)
श्री स्कंदमाता चालीसा
दोहा
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।।
चालीसा
जयति जयति जगत जननी, जय स्कंद माता।
दीनन पर करुणा करति, सदा सुखदाता।।
सिंह वाहिनी दुर्गा, धरी स्कंद रूप।
पुत्र कार्तिकेय के कारण, जग में प्रसिद्ध।।
पहाड़ों पर वास करे, सिंह संग सवारी।
कमलासन पर विराजती, शुभ्र मूरत प्यारी।।
अत्यन्त मनोहर रूप है, ममता की मूरत।
कृपा दृष्टि से भरे सदा, भक्तन के संकट।।
चतुर्भुजा धारी माता, श्वेत कमल पे बैठी।
संतान सुख देने वाली, दुख हरण करती।।
कमल पुष्प हाथों में, धरे शांति स्वरूपा।
सिंह वाहन पर आरूढ़ा, महिमा अनुपम रूपा।।
जगत पालिका है तू, अघ विनाशिनी माता।
तेरे चरणों में नमन, जयति जय माता।।
ध्यान धरें जो भक्त तेरे, सब कष्ट मिट जाते।
सकल मनोरथ पूर्ण करें, मनवांछित फल पाते।।
तेरे दर पे जो भी आए, खाली ना जाता।
दीन दुखी और निर्धन का, संकट हर जाता।।
शरण में आए जो भी तिहारी, उनको सुख देना।
भव सागर से तार कर, भव भय हर लेना।।
कृपा दृष्टि सदा रखना, संकट हारिणी माता।
सकल जगत की पालनहारी, जयति जय माता।।
जयति जयति जय स्कंदमाता, हम सबकी अंबा।
संतान सुख देने वाली, हमारी तुम शांभवी।।
सिंहासन पर विराजती, श्वेत कमल पे बैठी।
दीनन पर कृपा कर, हमारे कष्ट हरती।।
दोहा
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।।
Mata Skandmata Chalisa in Hindi