श्री दधिमती माता चालीसा (Shri Dadhimati Mata Chalisa)

श्री दधिमती माता चालीसा

चौपाई

दधि सागर में प्रगटी ज्वाला|
भई सुरा सुर हुई विहाला||

जब से दधिमथी नाम कहायो|
माँ को जग में ठाट सवायो||

तू ब्रह्माणी तू लक्ष्मी रूपा|
स्वप्न दियो माँ उदयपुर भूपा||

निज मंदिर आकर बनायो|
राणो जग में नाम कमायो||

है त्रिशूल तुमको अति प्यारा|
जिसको जगत पूजता सारा||

पग-पग का अपराधी तेरा|
दुष्टों से जीवन बचाओ मेरा||

जिन पर कृपा आपकी होती|
बिन डाले बीज खेती होती||

भक्तों को जो व्यर्थ सतावें|
यम के द्वार कोडा खावे||

दुःख और गृह कलेश हटाती|
लक्ष्मी बन दरिद्र मिटाती||

तू ही उमा रमा ब्रह्माणी|
भक्तों को देती मनमानी||

तू ही काली तू ही भवानी|
शत्रु नाश करो महाराणी||

तू ही दुर्गा तू ही तारा|
तू ने जग का कष्ट निवारा||

रिद्धि-सिद्धि चेरी तेरी|
गावे निस-दिन स्तुति तेरी||

तू महिषासुर संहारा|
दुर्गा बन शुंभ-निशुंभ मारा||

जब देवों पर विपदा आई|
रक्षा करी दधिमती माई||

जब सुर असुर संहारे|
तब पुकारे दुःख के मारे||

जब दधिमथी ले अवतार पधारी|
हरी सुरो की विपदा भारी||

पुत्रहीन जो दर पे आता|
बिन मांगे फल वह पाता||

मुझे भरोसो दधिमथी थारो|
तुम बिन नही और सहारों||

दधिची की तू रखवाली|
कोई न लौटा दर से खाली||

जो-जो शरण तुम्हारी आवे|
भूत पिशाच निकट नही आवे||

नही पूजा पाठ में जानू|
आज्ञा निस-दिन माँ की मानू||

केवल नाम आपका ध्याऊ|
चरणों में नित शीश नवाउँ||

जय दधिमथी दधीच अम्बा|
भव सागर तारण अवलम्बा||

जय चामुण्डा जय दुर्गा राणी|
महिमा तुम्हरी जग न जाणी||

तू ही जनक सुता घर आई|
तुम्हारी महिमा जग में छाई||

तू ही गिरिजा तू ही राधा|
भक्तों की हरती भव बाधा||

मुझमें है दुःख कष्ट निवारों|
जय जय माँ का नाम उचारों||

मरू मांगलोद बैठी माता|
जय अम्बा जय दधिमथी माता||

प्रेम भक्ति से गुण जो गावे|
दुःख दरिद्र निकट नही आवे||

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा|
दर्शन में नही किया विलम्बा||

माँ का ध्यान धरे दिन राता|
दर्शन दे दो दधिमथी माता||

अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता|
हमारा दुःख हरो दधिमती माता||

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे|
जीते है माँ तेरे सहारे||

जो सत बार पढें चालीसा|
इच्छा पूरण करती गौरीसा||

जो चालीसा पढें हमेशा|
ता के घर नही रहे कलेशा||

दधिमती चालीसा जो नर गावै|
सब सुख भोग परम सुख पावै||

जो यह पाठ करे दिन राता|
मन वांच्छित फल वह पाता||

पढें सुने जो यह चालीसा|
नाश हो दरिद्र कष्ट कलेशा||

जयति जय दधिमती माता|
कैलाश चरणों में शीश नवाता||

Shri Dadhimati Mata Chalisa in Hindi

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