मच्छर चालीसा (Machhar Chalisa)
मच्छर चालीसा
चौपाई
जय जय जय मच्छर बलशाली।
काला तन और भुजा काली।।
तीखे तीखे सूंड़ तिहारे।
सतत चूससे रक्त हमारे।।
भेद भाव तुम्हें नहीं भाये।
सब पर सम किरपा बरसाये।।
कुटी महल सब एक समाना।
हर घर में है आना जाना।।
राजा हो या रंक भिखारी।
हर मानव पर किरपा भारी।।
भक्ति भाव का खेल रचाते।
रक्त सभी का एक मिलाते।।
जोगन हो या कोई जोगा।
सबने दंश तुम्हारा भोगा।।
सौ रोगों के बनते कारन।
हरते जाँ बस आनन फानन।।
अरज किसी क़ी कभी न सुनते।
सबको हीन बहुत हो गुनते।।
बनते तुम हो अति दुखदायी।
तुम ना करते कभी भलाई।।
डंकन में तुम्हरे विष ब्यापे।
नाम मात से मानव काँपे।।
चिकनगुनिया और मलेरिया।
तुम देते सबको फायलेरिया।।
कूड़ा करकट वास तिहारे।
गंदा जल लगते अति प्यारे।।
अंधेरे पर वर्चस्व तुम्हारा।
डरता तुमसे मानव सारा।।
भिनभिन भिनभिन गान सुनाते।
गान सुनाकर सबै डराते।।
भैंस बराबर काला अच्छर।
काले होते सारे मच्छर।।
भेदभाव ना तुम्हें सुहाये।
सबको एक समान सताये।।
गोरी चमड़ी हो या काली।
तुम खाते हो भर भर थाली।।
तेरा चुंबन बड़ा सताये।
नाजुक नाजुक वदन सुजाये।।
हाय! तुम्हारी अक्षुण वाहिनी।
बनकर आती परम घातनी।।
तुम्हरे रहते चैन न पावें।
रात रात भर नैन जगावे।।
साम दाम औ दंड विवेका।
तुम्हरे आगे लगते नेका।।
काम नहीं अब ये भी आवे।
आल आउट न तुम्हें डरावे।।
आय थे बन बड़े लडैया।
हारे देखो मार्टिन भैया।।
रोके तुम्हरी जो मनमानी।
जय मच्छरदानी महरानी।।
इनसे बेबस तुम हो जाते।
आकर इनमें काल समाते।।
मरते मरते ज्ञान सिखाते।
हमरी गलती हमें बताते।।
कैसे घर तुमको मिल जाता।
मानव कचरा न यदि जमाता।।
मर जाती तुम्हरी भी नानी।
ना मिलता जो गंदा पानी।।
सुनो सुनो! मच्छर महराजा।
सुनो ख़बर अब तुम ये ताजा।।
देखो हम ये कसम उठाते।
सच्ची बात तुम्हें बतलाते।।
गंदा जल ना जमा करेंगे।
तुम्हरे हाथ न मरा करेंगे।।
जो भी समझे खेल तमाशा।
अंत करे वो जीवन आशा।।
कूड़े कचरे का करे निवारण।
मरे न कोई कभी अकारण।।
कहत ‘कुमार’ सुनो नर नारी।
हरे विपदा ये सभी भारी।।
मसक चलीसा जो नर गाये।
मसक कभी ना उन्हें सताये।।
Machhar Chalisa in Hindi