श्री रामेश चालीसा (Shri Ramesh Chalisa)

श्री रामेश चालीसा

दोहा

वीर प्रभु का ध्यान धरए ले सबल नानेश।
गुरु गुण गाऊँ प्रेम सेए जय जय जय रामेश ।।
हुक्मगच्छ के साथ नाथ होए ज्योतिपुंज गुणधाम।
श्रद्धायुत् श्री चरण मेंए वंदन हो निष्काम ।।

चौपाई

जय जय राम नाम सुख कन्दा।
जय जय जय भूरा कुल चन्दा।।
पिता नेम के नयन सितारे।
माँ गवरा के प्राण पियारे।।

दो हजार नो चेत सुहाना।
सुद चौदस धारा तन बाना।।
देशनोक में मंगल छाया।
मरूमाटी का मान बढाया।।

जन्म नाम जयचन्द कहाया।
पुर परिजन मन राम सुहाया।।
पढकर जैन जवाहर वाणी।
तिरे अनेकों भवि जन वाणी।।

कथा अनाथ सनाथ पढी जब।
धर्म शक्ति पहचानी थी तब।।
मुनि बनूं गर रोग नसावें।
धारा मन में परचा पावे।।

फीर नानेश शरण में आये।
संयम लेने को ललचाये।।
पूनम संत फतह अरु मोती।
हुए प्रसन्न जब चर्चा होती।।

संयम पथ की करी समीक्षा।
तब गुरुवर से लीनी दीक्षा।।
तन की ममता दूर निवारी।
मन की समता खूब निखारी।।

मनोयोग से सेवा साधी।
वीतराग आज्ञा आराधी।।
गुरु आज्ञा में मुझको खोना।
धारा जल्दी पावन होना।।

जो साधक लायक बनता हैं।
वो संघनायक का बनता हैं।।
बने संघ के तुम अधिकारी।
फली महिमा जग में भारी।।

नाना से तुम तुम से नाना।
लगता चेहरा एक समाना।।
पंचाचार पलावें पाले।
मर्यादाओं के रखवाले।।

सकल शास्त्र के तुम हो ज्ञाता।
पंडितगण भी लख हर्षाता।।
महाज्ञानी हैं महा तपस्वी।
महाध्यानी हैं महामनस्वी।।

मौन आत्मजयी कहलाते।
महावीर का धर्म निभाते।।
उपधि अल्प मेधावी राया।
अतिशय धारी अद्भुत माया।।

सम्यक श्रद्धा शक्तिमान है।
श्री बहुश्रुतजी सत्यवान।।
सादा जीवन गुरुवर त्यागी।
ऊँचा चिंतन जिन अनुराणी।।

क्रिया चारू चरित सवाया।
मानो चौथा आरा आया।।
जीवन में दर्शन आगम के।
राम गुरू सूरज सम चमके।।

व्यसनमुक्त सन्देश सुनाया।
सुख शांति का मार्ग दिखाया।।
घट घट ज्ञान प्रदीप जलाये।
तत्व ग्रंथि को खोल बताये।।

मिथ्या सम्यक भेद बताया।
जिन धर्मी का मान बढाया।।
नयनों से अमृत झरता है।
पापी भी पावन बनता है।।

कृपा किरण जब जिस पर पडती।
मन की कलियें उसकी खिलती।।
राम नाम संकट सब हर्ता।
राम नाम संपत सब कर्ता।।

राम नाम है जब हितकारी।
राम नाम है मंगलकारी।।
जपो राम सुख दुःख की बेला।
जपो राम जन बीच अकेला।।

क्षमा श्रमण हे शांत सुधाकर।
करूणा सागर धर्म दिवाकर।।
सुनो सुनो गुरुदेव हमारी।
आई है अब मेरी बारी।।

मारग लम्बा घोर अंधेरा।
साथ चलो या करो सवेरा।।
टूटी नैया दूर किनारा।
भव जल शोखो बनो सहारा।।

पौरूष जागे आलस भागे।
शुभ आशीष यही हम मांगे।।
गौतम की है यही पिपासा।
अजर अमर दो शिव पद वासा।।

दोहा

चालीसा गुरु राम का।
संकटमोचन हार।।
पढे सुने जो भाव से।
होवे भव से पार।।

काया रस नभ पद बरस।
मास पोष बद ध्यान।।
मुनि गौतम रचना करी।
बालाघाट सुस्थान।।

Ramesh Chalisa in Hindi

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