श्री मेहेर चालीसा (Meher Chalisa)
श्री मेहेर चालीसा
दोहा
हरि ! परमात्मा ! अल्लाह ! अहूरमज्द ! गॉड ! यज़दान-हू !
जय ‘मेहेर’ साहिबे-जमाँ ! जय जय निराली शान हू !!
जय भक्त उनके मस्त उनके खींच लाते जो उन्हें भूलोक पर !
धूल उनकी सिर लगाऊँ, हिये लाऊँ प्रेम के उनके सहारे ‘मेहेर’ को मैं पाये जाऊँ।
चौपाई
जय बाबा ! जय अन्तर्यामी ! जय अनन्त ! जय जगदाधार !
पूरण ब्रह्म सनातन स्वामी, अखिल विश्व के पालनहार ।।
जय सौम्य मूर्ति ! जय शुभ, पावन ! जय मंगलकारी !
जय भक्त जनन की आस एक, जय जय अनन्त लीलाधारी ।।
युग के राही धर्म सिपाही, जय तप के भण्डार हरे !
दरस मात्र से गति सुधरैअरु, क्षार होंहि अध पुञ्ज खरे ।।
निराकार साकार रूप, जय नर-नारायण दोऊ !
भीतर बाहर सरग पतारन, तुम्हें छोड़ नहिं कोऊ ।।
भक्तन के जय ‘बाबा’ ! जय-जय बाबाजान के ‘मेहेरवान’ !
उपासनी के भण्डारी जय हे ! सुर-कुल पंकज भानु ।।
सिध्द जनन के शहंशाह, जय दिव्य सनातन ज्योति !
निर्विकार जय धर्म-मूर्ति ! जय शान्ति अखण्ड विभूति ।।
तुम सन प्रीति करे से प्रानी, तुम समान हुइ जाहीं ।
जनम-जनम के पातक छूटैं, अंत मेहेरपद पाहीं ।।
व्याकुल मानव को हो तुम, अब पार लगाने आये ।
देश जाती अरु धर्म रंग का, भेद मिटाने आये ।।
जगती को दिखलाने शक्ति, भक्ती की फैलाने महिमा ।
प्रगट हुये शीरींमाई से, सतजीवन की लेकर गरिमा ।।
मैं गाऊँ क्या तुम्हरी महिमा, शेष शारदा पार न पाहीं ।
तुम हो अनन्त महिमा अनन्त, अन्त तुमहिं में सबहि समाहीं ।।
मर्यादा के राखन हित तुम, मर्यादा पुरुषोत्तम बन आये ।
होकर अनन्त व्यापी दिगन्त, मर्यादा में बंध कर आये ।।
तुमहिं बने गिरधर मीरा के, सूरदास के श्याम ।
नरसी के थे सामलिया तुम, तुलसीदास के राम ।।
‘केशव’ के तुम प्रियतम बाबा, हिय में आन बिराजे हो ।
अमित कृपादृष्टि सेवक पर, मन-मंदिर में राजे हो ।।
तुमहिं परस जन्मन को पापी, आज निहाल भयो रे ।
तुव पद-पंकज पाकर पावन, त्रय सन्ताप दह्यो रे ।।
चाहूँ नहीं जगत का वैभव, रिध्दि-सिध्दि नहीं चाहूँ ।
दुनिया दौलत माल खजाना, तुमहिं पाइ ठुकराऊँ ।।
चाहूँ सदा सलोनी मूरत, यहै देख हरषाऊँ ।
इसको ध्याऊँ इसको पाऊँ, इस पर बलि-बलि जाऊँ ।।
श्रवण सुनैं तौ नाम तिहारो, रसना तुव गुण गावै ।
छोड़ जगत के फंन्दे मनुवां, एक तुमहिं को ध्यावैं ।।
बसौ मोर नैनन में ऐसे, तुमहिं छोड़ नहिं और लखाई ।
सुरति एक रट मेहेर नाम की, दूजो और न साईं ।।
जब जब जन्म धरौं धरनीं में, सगुण रूप को पाऊँ ।
सेवा भक्ति पूरी करके, निर्गुण माहिं समाऊं ।।
मैं चरनन को दास तिहारो, निशदिन यह मनाऊँ ।
करो कृपा ऐसी ठाकुरजू, तुव सेवा को पाऊँ ।।
जब जब धरनि माहिं तुम आओ, अधम उधारन स्वामी ।
मोहिं अधम को भूल न जाना, हौं तुम्हार अनुगामी ।।
तुव सेवा भक्ति दर्शन हित, मैं हूँ नर तन पाऊँ ।
पाइ प्रकाश तुम्હારो प्रभुवर, लीला देख जुड़ाऊँ ।।
तुलसी की मैं पाऊँ भक्ति, मीरा की वह मस्ती पाऊँ ।
झूम-झूम कर नाचूँ सन्मुख, प्रेम के आँसू बहाऊँ ।।
भूल जगत सुध तन मन हू, श्रीचरण टेक रह जाऊँ ।
तुम्हीं साध्य आराध्य बनो मम, और कछू नहिं चाहूँ ।।
सूरदास की पाऊँ रसना, लीला तुव नित गाऊँ ।
निबल जान जो बाँह छुडाओ, हिये बाँध रह जाऊँ ।।
कबीरदास की मिलै फकीरी, निसदिन अलख जगाऊँ ।
जतन जतन से ओढ़ चदरिया, जस की तस धर जाऊँ ।।
देह तजौं तो काज तिहारे, गती जटायू पाऊँ ।
शान्तिमयी तुव गोद मिले, फिर धाम तिहारे जाऊँ ।।
शबरी के मैं बेर खिलाऊँ, साग बिदुर का लाऊँ ।
खाओ प्रभु जी उसी प्रेम से, वारी तुम पर जाऊँ ।।
तरी अहिल्या गणिका सदना, तरेउ अजामिल भागी ।
बाल्मीकि हू पार भये, जिन ‘मरा-मरा’ रट लागी ।।
ऐसहि भाग्य मिले मोहिं बाबा, एक यहै वर चाहूँ ।
बन निषाद चरणोदक पाऊँ, युग-युग हेतु जुड़ाऊँ ।।
ड्यूढ़ी का मैं बनूँ पहरुआ, निसदिन गश्त लगाऊँ ।
अञ्जनि सुत सम करुँ चाकरी, तुव दर्शन नित पाऊँ ।।
देव दनुज मानव ॠषि मुनि सब, द्वार तिहारे आवैं ।
नारद मुनि वीणा से पावन, नाम तिहारो गावैं ।।
तू ही ब्रह्मा तू ही विष्णु, शिव अनादि तू ही मैं जानूँ ।
तू ही इन्द्र बृहस्पति तू ही, त्रिभुवननाथ तुम्हीं को मानूँ ।।
जय सृष्टि के कर्ता धर्ता, जय प्रतिपालक त्रिभुवन के ।
दीनबन्धु हे दयासिन्धु, जय भक्त तुम्हारे तुम भक्तन के ।।
जय प्रेममूर्ति ! जय शान्तिमूर्ति ! जय दिव्यमूर्ति हे बाबा ।
जय पतितपावन भक्तवत्सल, जय शक्तिपुञ्ज हे बाबा ।।
जय अधम-उधारन विपद-विदारन, तेज पुंज अविनाशी ।
पावन मूर्ति पूर्ण मर्यादा, जय घट-घट के वासी ।।
ऐसी कृपा होइ मो ऊपर, विनय करौं कर जोरी ।
मन-मन्दिर मम छोड़ न जाना, शरण पड़ा हूँ तोरी ।।
अटल रहे मम श्रद्धा भक्ति, अटल रहे यह प्रेम की ज्वाला ।
जरत-जरत यामें जर जाऊँ, बुझे तभी यह पावन ज्वाला ।।
जो ज्वाला प्रहलादहिं दीन्हीं, भनैं सन्त सब कोई ।
गिरि से गिरेउ अग्नि में डारेउ, साँच को आँच न होई ।।
ध्रुव सम निष्ठा अचल मिले, जिन साक्षी है ध्रुवतारा ।
अमर मिलन हो प्रियतम तुमसे, छूटे यह जग सारा ।।
Meher Chalisa in Hindi